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अंडरग्रेजुएट दाखिलों की सचाई

अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के आवेदन स्वीकृत करने या न करने से पहले अमेरिका की दाखिला समिति के अधिकारी कई बातों पर गौर करते हैं। 

किसी अन्य देश के विद्यार्थी के आवेदन को स्वीकृत या अस्वीकृत करते वक्त दाखिला समिति के अधिकारियों को इन कुछ मुद्दों पर ज़रूर गौर करना होता है।

 

1. प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आकर्षित करना

संस्थान के नामांकन के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रतिभाशाली आवेदकों को आकर्षित करना और उन्हें प्रवेश देना दाखिला निदेशक की पहली प्राथमिकता होती है। इन लक्ष्यों को सामान्य तौर पर वरिष्ठ अधिकारी या कुछ मामलों में शिक्षक तय करते हैं। नामांकन के लक्ष्यों को तय करने में कई मुद्दों का ध्यान रखा जाता है, जैसे पुरुष और महिला विद्यार्थियों की संख्या, अमेरिका के अल्पसंख्यक छात्रों की संख्या, अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या, औसत जीपीए (ग्रेड प्वॉइंट एवरेज), मानकीकृत टेस्ट के लिए औसत आदि।

दाखिला निदेशक को लगभग हर बार अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नामांकन का लक्ष्य दे दिया जाता है। कभी-कभी यह संख्या लचीली रखी जाती है, यानी घटाई या बढ़ाई जा सकती है। ज्यादातर मामलों में संख्या तय रहती है। उदाहरण के लिए संस्थान में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नामांकन का लक्ष्य बीस फीसदी रखा गया और कक्षा में कुल छात्रों का लक्ष्य 500 है। इसका अर्थ है कि शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में निदेशक 100 अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नामांकन करने का उत्तरदायी होगा। अगर यह संख्या 95 या उससे कम होगी या 106 या उससे ज्यादा होगी तो संचालक खुश नहीं होंगें।

अगर 100 के लक्ष्य पर 500 से 600 अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने आवेदन किया तो इसका अर्थ है कि निदेशक के लिए चुनाव प्रक्रिया काफी कठिन होगी। वह दाखिला कम को दे पाएगा, जबकि उसे आवेदन ज़्यादा संख्या में नामंज़ूर करने होंगे।

 

2. परिसर में विविधता को बढ़ावा देना

दाखिला निदेशक के लिए विविधता एक बड़ा विषय है। इसमें जितने ज्यादा हो सकें उतने देशों के अंतरराष्ट्रीय छात्रों का नामांकन कराना शामिल है। इसका अर्थ है कि जिन देशों से कम आवेदन आते हैं उनके मुकाबले भारत जैसे देश के लिए चुनाव प्रक्रिया ज्यादा मुश्किल है क्योंकि यहां से हर साल हजारों छात्र आवेदन करते हैं।

 

3. समग्र मूल्यांकन

कक्षा की विविधता के अलावा एक अन्य तरह की विविधता का ध्यान रखा जाता है, यह है आवेदक की पृष्ठभूमि। अंडरग्रेजुएट आवेदकों को यह दिखाना होता है कि वे ऐसी पृष्ठभूमि से हैं जो उनकी शैक्षणिक कामयाबी से ज्यादा प्रभावी है। एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी में हिस्सा लेने का प्रमाण देना भी जरूरी है जैसे स्टूडेंट लीडरशिप, स्टूडेंट क्लब, संगीत और अभिनय, एथलेटिक्स आदि। अमेरिका में कॉलेज का अनुभव शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक अनुभव दोनों का समिश्रण है। क्लासरूम से बाहर के जीवन की भी क्लासरूम के जीवन जितनी ही अहमियत है। इसलिए दाखिला निदेशक उन आवेदकों की तलाश में रहते हैं जो दोनों तरह से खुद को असाधारण साबित करते हैं।

 

4. तलाश सही विद्यार्थियों की

दाखिला निदेशक के मन में अंतरराष्ट्रीय आवेदकों के प्रति सकारात्मक धारणा होती है, विशेष तौर पर भारत के छात्रों के प्रति। धारणा यह है कि अंतरराष्ट्रीय छात्र विदेश में पढ़ाई करने को सम्मान की नजर से देखते हैं और वे ज्यादातर मौकों का फायदा उठाने के लिए तैयार रहते हैं। यह भी उम्मीद रहती है कि अंतरराष्ट्रीय छात्र जिस शैक्षणिक माहौल से जुड़ते हैं, उसका हिस्सा बनने की हर संभव कोशिश करते हैं। ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय छात्र नए दोस्त बनाने और शैक्षणिक परिवार का हिस्सा बनने के लिए काफी प्रयत्न करते हैं।

 

5. समर्पण और सच्चा बर्ताव

ज्यादातर मामलों में यह माना जाता है कि अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के आवेदन बढि़या होते हैं और वे निर्देशों का पूरी तरह से पालन करते हैं। यह काफी अहम है। दाखिला निदेशक या प्रवेश समिति के सदस्यों के मन में यह बात रहती है कि अगर कोई आवेदक के रूप में निर्देशों का पालन नहीं करता तो उसके विद्यार्थी के रूप में निर्देशों का पालन करने की उम्मीद कम ही है।

 

6. नामांकन के बाद सफलता 

ज्यादातर दाखिला निदेशकों के मन में अंतरराष्ट्रीय आवेदकों के अंग्रेजी में बातचीत करने और शैक्षणिक स्तर पर आगे बढ़ने की क्षमता एक बड़ी चिंता होती है। हालांकि यह चिंता भारत के आवेदकों के लिए ज्यादा नहीं है और इस बात का ध्यान रखा जाता है। यह सच है कि विद्यार्थियों और शिक्षकों की सफलता के लिए प्रभावी ढंग से बातचीत करना काफी अहमियत रखता है। कभी-कभी अंतरराष्ट्रीय छात्र अलग-अलग संस्थानों में अंग्रेजी की मांग को निषेधात्मक या दंडात्मक मानते हैं। यह सच नहीं है। सच में तो यह छात्र की सफलता को सुनिश्चित करने वाला कदम है। दाखिला, छात्रों के मामलों और शैक्षणिक स्तर पर जुड़े लोग ऐसे माहौल को बनाने के लिए चिंतित रहते हैं जिसमें उनके छात्र उन्नति करें। अंडरग्रेजुएट छात्र के लिए कोई यह नहीं चाहेगा कि वे असफल हो जाएं, वह भी उस आधार पर जिससे बचा जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी के आवेदन में अंग्रेजी में महारत रखना काफी अहमियत रखता है। 

 

डॉन मार्टिन कोलंबिया यूनिवर्सिटी, शिकागो और नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के पूर्व दाखिला प्रमुख रह चुके हैं। उन्होंने एक किताब ‘रोड मैप फॉर ग्रेजुएट स्टडी’ लिखी है।

वेस्ली टीटर नई दिल्ली में एजुकेशन यूएएसए के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक रह चुके हैं। वह मल्टी मीडिया आउटरीच कैंपेन ‘10 स्टेप्स टु स्टडी इन द युनाइटेड स्टेट्स’ के संपादक भी हैं।

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शैलेन्द्र वागद्रे का छायाचित्र

अमेरिकी विश्वविद्यालयों में अंडरग्रेजुएट दाखिलों बाबत बहुत ही उपयोगी जानकारी प्राप्त हुई. दाखिलों में एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी के महत्त्व के बारे में भी पता चला...धन्यवाद.