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पुस्तकालयों का नया अवतार!

पूरे अमेरिका में पुस्तकालय कारोबार और कलाओं को प्रोत्साहित करने के मंच के रूप में तब्दील हो रहे हैं।
 

लाइब्रेरी शांत और पावन जगह होती हैं जहां लोग खामोशी के साथ पढ़ाई करते हैं और बातचीत करने वाले किसी भी शख्स को चुप करा देते हैं। ठीक कहा ना, लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। अमेरिका की शैक्षणिक और पब्लिक लाइब्रेरी खुद को मेकरस्पेस यानी कार्यशाला के रूप में बदल रही हैं। एक ऐसी जगह जहां पर लोग सामान बनाने, व्यापार बढ़ाने, कला, संगीत और फिल्म बनाने का काम कर सकें, सॉ़फ्टवेयर प्रोग्राम विकसित कर सकें और सामान्य तौर पर कहें तो अपनी कल्पनाशक्ति के घोड़े दौड़ा सकें। तेजी से बढ़ रहा यह आंदोलन, राष्ट्रपति बराक ओबामा की ‘‘एजुकेट टू इनोवेट”  पहल और युवाओं को विज्ञान व इंजीनियरिंग से जोड़ने के लिए नए और मौलिक रास्तों के बारे में सोचने, युवाओं को सृजन व निर्माण करने को प्रोत्साहित करने और सामान बनाने के लिए आविष्कार करने न कि सामान का उपभोक्ता बनने के आह्वान से जुड़ा हुआ है।

हालांकि इस बात का कोई आधिकारिक अंदाजा नहीं है कि अमेरिका की करीब एक लाख बीस हजार लाइब्रेरी में से कितनी मेकरस्पेस में तब्दील हुई हैं लेकिन यह प्रवृत्ति व्यापक रूप से पहचान बना रही है।

अमेरिकन लाइब्रेरी एसोसिएशन के प्रेज़िडेंट कर्टनी यंग कहते हैं, ‘‘अमेरिकी लाइब्रेरी सिर्फ जानकारी के निष्क्रिय खजाने नहीं हैं। ये अब इंटरएक्टिव हो गई हैं। जानकारी और तेजी से बदलते विश्व में प्रगति करने के लिए लोगों को ज़रूरी दक्षता पहुंचाने की दृष्टि से हमारा समाज एक अहम मोड़ पर है। इस मामले में लाइब्रेरी सकारात्मक माहौल बनाने में एक बड़ी भूमिका निभाएंगीं जहां लोग सीखेंगे, आगे बढ़ेंगे और निर्माण करेंगे।” 

मेकरस्पेसेज को फैबलैब्स और हैकरस्पेसेज के नाम से भी जाने जाते हैं। फैबलैब्स, फैब्रिकेशन लैबोरेटरी से बना है। मेकरस्पेस ऐसी सरल जगह भी हो सकता है जहां सिर्फ कुर्सियां और मेज हैं और लोग आकर मिलजुलकर काम करते हैं। या फिर यह बड़े स्तर पर हो सकता है जैसे कंप्यूटर, 3डी प्रिंटर, विनाइल कटर, कारपेन्ट्री टूल्स, प्रोग्राम बोर्ड, वाद्य यंत्रों, ऑडियो उपकरणों, सिलाई मशीनों, उद्योग सामग्री और अन्य सामानों से सुसज्जित वर्कशॉप की तरह। मेकरस्पेसेज ने लाइब्रेरी को किताबें देने के लेनदेन के मॉडल से हटाकर परिवर्तनकारी मॉडलों में बदल दिया है। यंग समझाते हैं कि नया मॉडल कौशल साझा करने, मिल-जुल कर शिक्षा लेने और अभ्यास करके सीखने पर केन्द्रित है।

रेनो स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ नवादा की डेलामेयर साइंस एंड इंजीनियरिंग लाइब्रेरी के निदेशक टॉड कोलग्रोव का कहना है, ‘‘अब बहुत-से प्रकाशन और पुस्तकें ऑनलाइन उपलब्ध हैं, इस कारण पुस्तकालयों को अपने उद्देश्य और मिशन की फिर से पड़ताल करनी पड़ी है।”

कोलग्रोव कहते हैं, ‘‘पुस्तकालयों के बीच ज़्यादा से ज़्यादा जगह घेरने की स्पर्धा-सी चल पड़ी थी और सभी एक ही तरह की किताबों का संग्रह बनाने में लगे थे। यदि इन किताबों को साझा करने का कोई रास्ता न हो तो ऐसा करना समझ में आता है, लेकिन जब इनको साझा करने का रास्ता हो तो यह पूरी तरह से समझ से परे है। इसके अलावा दुनिया का बहुत-सा ज्ञान अन्य लोगों के दिमाग में रहता है। मेकरस्पेस ज्ञान को साझा करने का एक रास्ता है।”   .

कोलग्रोव ने जिस शैक्षिक लाइब्रेरी का जिम्मा साल 2010 में संभाला, उसमें तकनीकी पत्रिकाओं का काफी बड़ा संग्रह था लेकिन एक समस्या थी। ‘‘मैंने देखा कि लाइब्रेरी में तीन लोग ही रहते हैं। एक अध्ययन में यह बात सामने आई कि छात्र और अध्यापक मुख्य रूप से लाइब्रेरी के पब्लिकेशन का इलेक्ट्रॉनिक संस्करण इस्तेमाल करते हैं।”   इसके बाद कोलग्रोव की टीम ने कम इस्तेमाल होने वाली चीजों को गोदाम में भेज दिया। उन्हें खाली जगह मिल गई जहां अतिरिक्त फर्नीचर लगाया गया। पैसे की कमी थी, इस कारण उन्होंने लाइब्रेरी की दीवारों पर व्हाइटबोर्ड पेंट किया और छात्रों को चित्र बनाने और आकृतियां उकेरने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके अलावा लाइब्रेरी के सदस्यों को खाना लाने की इजाजत भी दी गई।

कोलग्रोव समझाते हैं, ‘‘हमने अन्य मेकरस्पेसेज से संबंध विकसित किए और फिर एक के बाद दूसरी चीज़ होने लगी। हमने थ्री-डी स्कैनिंग और प्रिंटिंग के उपकरण लगाए। हमने कंप्यूटर वर्क स्टेशन बनाए। इनका निर्माण वहीं पर किया गया। अब यहां पर काफी सृजनात्मक ऊर्जा है और हमारे पास किसी भी दिन दो सौ से ढाई सौ उपयोगकर्ता हैं। हम सक्रिय रूप से इस बात की तलाश कर रहे हैं कि इक्कीसवीं सदी की लाइब्रेरी का मतलब क्या है। इनका अर्थ सिर्फ किताब ही नहीं है, इसका मतलब किसी न किसी रूप से समुदाय से जुड़े रहना भी है।”

डेलामेयर साइंस एंड इंजीनियरिंग लाइब्रेरी में नियमित तौर पर जाने वाले विद्यार्थी पैट्रिक स्मिथ का कहना है, ‘‘विद्यार्थियों को थ्री-डी प्रिंटर बहुत पसंद आए। किसी ने मस्तिष्क का प्रिंट निकाला तो किसी न छोटे से वी-8 इंजन का प्रिंट। इसमें पिस्टन को ऊपर उठते, नीचे   गिरते हुए और क्रैंकशा़फ्ट को मुड़ते हुए देख सकते थे। ‘‘यह जगह आपको अनजान लोगों से मुलाकात करने को प्रोत्साहित करती है और यह वास्तव में मायने रखता है। हम किताबों से काफी बातें सीख सकते हैं लेकिन हमारी बौद्धिक क्षमताओं का वास्तविक विकास अन्य लोगों से होता है जो उसी तरह का काम करने में दिलचस्पी रखते हैं।” 

मेकरस्पेस मूवमेंट में अब हर तरह की लाइब्रेरी शामिल हैं लेकिन इसकी शुरुआत कुछ हद तक न्यू यॉर्क के एक छोटे से गांव की फैटेविल फ्री लाइब्रेरी ने की। फैटेविल फ्री लाइब्रेरी की कार्यकारी निदेशक सूसन कॉन्सिडाइन का कहना है, ‘‘हम अपने प्रोग्राम तय करने में काफी जोखिम उठाते हैं। हम अपने समुदाय से सीधे जुड़ते हैं, उनसे पूछते हैं कि आपके क्या सपने और आकांक्षाएं हैं। इसके बाद उनको लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए अपने संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं।”   सूसन को वर्ष 2013 में व्हाइट हाउस चैंपियन ऑफ चेंज से भी सम्मानित किया जा चुका है।

फैटेविल फ्री लाइब्रेरी के मेकरस्पेस का लक्ष्य हर आयु वर्ग तक पहुंचना है। इसका लिटिल मेकर्स एरिया 5 से 8 साल के बच्चों में तर्कक्षमता, समाधान खोजने और साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित में दक्षता विकसित करने की कोशिश करता है।

सूसन का कहना है, ‘‘इस तरह की सीख के लिए लाइब्रेरी एक आदर्श जगह है। लाइब्रेरी लोगों को युवा काल से वृद्धावस्था तक के पूरे जीवन काल में सेवा मुहैया कराती है। हमारे पास इस बात का कोई कारण नहीं है कि सूचनाओं के निष्क्रिय उपभोक्ता बने रहें जबकि हम लाइब्रेरी आकर चीजों का निर्माण कर सकते हैं।”

 

स्टीव फॉक्स स्वतंत्र लेखक हैं। वह वेंटुरा, कैलि़फोर्निया में रहते हैं और पूर्व में समाचारपत्र प्रकाशक और संवाददाता रह चुके हैं।

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