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  • संबंधों की बुनियाद आर्थिक एवं सामाजिक रिश्तों पर
    हरी किशन ओझा

    भारत और अमरीका दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, जिनमें काफी समानताएं हैं। भारत और अमरीका के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ता जा रहा है और आने वाले वर्षों में और अधिक बढ़ने की संभावना है। इसी प्रकार सैन्य सहयोग भी बढ़ा है। बहरहाल, अमरीका भारतीय उपमहाद्वीप में स्थिरता की वकालत करता रहा है, जिसमें कश्मीर मुद्दे पर तनाव कम करना और परमाणु हथियारों के प्रसार व परीक्षण का परित्याग भी शामिल है। यह अब अच्छी तरह स्थापित हो चुका है कि दोनों देशों के पास एक-दूसरे को देने के लिए बहुत कुछ है। प्रति चार वर्षों में होने वाले इस चुनाव में दो पार्टियां अपनी दावेदारी पेश करती हैं। यह प्रक्रिया राष्ट्रपति चुनाव की औपचा

  • नए राष्ट्रपति का बेसब्री से इंतज़ार
    प्रवीण गोला

    आजकल अमेरिका में चुनावों का ज़ोर-शोर से बोलबाला है । अमेरिका से जुड़े सभी देशों की निगाहें वहाँ के नए राष्ट्रपति का बेसब्री से इंतज़ार कर रही हैं । वहाँ की दो प्रमुख पार्टियों के दमदार दावेदार अपने-अपने आने का मार्ग बना रहे हैं । जहाँ एक ओर रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड  ट्रंप अपने वादों से लोगों को लुभा रहे हैं तो वहीँ दूसरी ओर डेमोक्रेटिक पार्टी की हिलेरी क्लिंटन अपनी जीत पर सभी देशों के साथ एक घनिष्ठ संबंध बनाने की बात कर रही हैं ।

  • नागरिकों के मन में बड़ी उत्सुकता एवं व्यग्रता
    जगदीश शर्मा

    भारत-अमरीका सम्बन्ध विगत दो दशकों में आमूलचूल परिवर्तान के दौर से गुजरे हैं. शीत युद्ध के बाद भारत की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक नीतियाँ प्रभावित हुई हैं, शिक्षा, संस्कृति और लोकतान्त्रिक व्यवस्था और प्रक्रिया में प्रभाव स्पष्ट परिलक्षित हैं. भारत और अमरीका विश्व के दो बड़े देश है जहाँ लोकतंत्र  वैश्विक परिदृश्य पर खरा उतरा है और लगातार संपुष्ट हुआ जो विश्वशांति और विकास हेतु केंद्रीय है.

  • नतीजे चाहे जो हों, संबंध नई ऊंचाइयों को छूने वाले हैं!
    दीपक कुमार तिवारी

    अमेरिका भारत का सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार है.यदि सामरिक मुद्दों को देखा जाए तो आज भारत अपने सबसे अधिक सैन्य अभ्यास अमेरिका के साथ ही करता है.हाल ही में हुआ अभूतपूर्व लेमोआ समझोता इस बात का एक अवश्यंभावी चिन्ह है कि हम दोनों देशों के बीच की घनिष्ठता महज एक खरीद-फरोख्त की दृष्टि से प्रभाव में लाई गई व्यवस्था नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों की वसुधैव कुटुंबकम जैसी दिग्दर्शी सोच को परिलिक्षित करती है.आज के इस वैश्वीकरण के युग में व विशेषकर ब्रेग्जिट के प्रकरण के पश्चात्, यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि भारत और अमेरिका दुनिया में अपने आप को आर्थिक दृष्टि से दो सबसे ज्यादा चमकीले बिंदुओं के रूप मे

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