मुख्य पृष्ठ
1 2 3

भारत की कला और संस्कृति का उत्सव

कैनेडी सेंटर में भारतीय कला और संस्कृति की विविधता का जश्न


वाशिंगटन के जॉन एफ. कैनेडी सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स के मैक्सिमम इंडिया फेस्टिवल में 1 से 20 मार्च तक भारत से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रदर्शन हुआ। इसमें शिरकत करने वाले ज़्यादातर लोगों ने पाया कि उनकी राय भी बाकी लोगों की तरह मिलीजुली थी। खुशी के साथ-साथ निराशा का भी अनुभव।

कारण यह था कि नृत्य, संगीत, नाट््य प्रदर्शनों, फिल्मों, पैनल चर्चाओं, बहुत तरह के विजुएल आर्ट, टेक्सटाइल्स, पॉटरी, आभूषण और यहां तक कि खान-पान के प्रदर्शन का पूरी तरह अनुभव लेना लगभग असंभव ही था। अगर आप और सारे काम छोड़कर इस उत्सव को पूरा समय देते तब भी आखिर में आपको यही पता चलता कि आपने भारतीय कला और संस्कृति की समृद्धि और उसकी विविधता का बस नमूना देखा है।

कैनेडी सेंटर ने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के सहयोग से 500 कलाकारों द्वारा 50 से अधिक अलग-अलग प्रस्तुतियां, कार्यक्रम और प्रदशर्नियां आयोजित कीं।

आयोजन से पहले एक इंटरव्यू में कैनेडी सेंटर के अध्यक्ष माइकल कैसर ने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों के उस्तादों को एकसाथ हमारे मंच पर देखने का दुर्लभ अवसर होगा। सितार की शांत ध्वनि से लेकर रॉक बैंड्स की तेज़ आवाज तक ,॒हम भारत के महान संगीत और संगीतकारों को व्यापकता के साथ पेश करेंगे।’’

इस सेंटर में मैक्सिमम इंडिया साल का सबसे बड़ा आयोजन था। सेंटर ने पिछले पांच सालों तक पौराणिक सिल्क रूट के लोगों, जिनमें जापान, चीन और मध्य पूर्व शामिल हैं, की कला और संस्कृति की तलाश की थी, यह उसी का समापन था।

कैनेडी सेंटर के अंतरराष्ट्रीय प्रोग्राम एवं नृत्य की वाइस प्रेज़िडेंट एलिसिया एडम्स के मुताबिक यह एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों की कलाओं को प्रस्तुत करने की12 साल पुरानी योजना का भी समापन है। मैक्सिमम इंडिया ने भारतीय फिल्म और साहित्य पर कई संवाद-परिचर्चा का आयोजन किया, जिसमें चर्चित अभिनेताओं, फिल्मकारों और लेखकों ने हिस्सेदारी की। इनमें से एक परिचर्चा नोबल पुरस्कार प्राप्त रवींद्रनाथ टैगोर की 150वीं जन्मतिथि पर भी आयोजित हुई।

नृत्य की दुनिया
एक से बढ़कर एक बेहतरीन नृत्य मैक्सिमम इंडिया की खास विशेषता थी। एडम्स कहती हैं, ‘‘भारतीय नृत्य की अनेक शैलियों के महान नर्तकों में से किसी को भी नजरंदाज करना असंभव था।’’

भारतीय शास्त्रीय नृत्य की भिन्न परंपराओं की दो दिग्गज नृत्यांगनाओं- माधवी मुद्गल और अलारमेल वल्ली ने एक साथ ‘समन्वयः ए कमिंग टुगेदर’ पेश किया। मुद्गल ओडिसी की जानीमानी नृत्यांगना हैं। उन्होंने लोगों को शिक्षित कर, कार्यशालाओं के जरिये और अपने नृत्य प्रदर्शनों से भी इस शास्त्रीय नृत्य को पुनर्जीवित किया है और दर्शकों का दायरा भी बढ़ाया है।

वल्ली भरतनाट्यम में पारंगत हैं और नृत्य निर्देशक हैं। न्यू यॉर्क टाइम्स के एक समीक्षक ने लिखा, ‘‘इस समय, हमेशा की तरह भारत से कई अद्भुत नर्तक यहां आए हैं, लेकिन अलारमेल वल्ली आदर्श हैं।’’

दक्षा सेठ छाऊ की वीर नृत्य शैली की पहली महिला एकल नर्तक हैं। उन्होंने ‘सर्पगति ः द वे ऑफ सर्पेंट’ नामक एक समकालीन नृत्य नाटिका में कई अलग-अलग नृत्य परंपराओं का समावेश किया, जो आधुनिक भारतीय नृत्यशैली में एक अद्भुत उदाहरण है।

उन्होंने इंडिया टुडे को बताया, ‘‘कई वर्षों तक मैंने देश की कई वीर कला रूपों का प्रशिक्षण लिया और उनमें से मैंने नृत्य की अपनी भाषा विकसित की।’’

भारत से बाहर की दो नृत्य कंपनियों ने इस समारोह में प्रदर्शन करके अमेरिका में भारतवंशियों की सांस्कृतिक मज़बूती का ही उदाहरण पेश किया। मिनियापॉलिस, मिनेसोटा की रागमाला भरतनाट्यम की दिग्गज नृत्यांगना हैं। वाशिंगटन से दक्षिणा/डेनियल फीनिक्स सिंह डांस कंपनी ने पारंपरिक नृत्य शैली को आधुनिक नृत्य से जोड़कर युवा दक्षिण एशियाइयों की विभिन्न पहचानों को प्रतिबिंबित किया।

कैनेडी सेंटर की एडम्स कहती हैं, ‘‘हमने काफी शोध किया और बहुत सी प्रस्तुतियां देखीं जिससे कि दर्शकों के सामने भारतीय संस्कृति को संपूर्णता में पेश किया जा सके।’’

सांस्कृतिक आदान-प्रदान

मैक्सिमम इंडिया ़फेस्टिवल की क्यूरेटरएलिसिया एडम्स बताती हैं कि कैनेडी सेंटर वाशिंगटन, डी.सी. और पूरे अमेरिका के दर्शकों के लिए दुनिया भर की श्रेष्ठ कला और संस्कृति को यहां लाने का काम करता है। एडम्स कहती हैं, ''मैक्सिमम इंडिया जैसे कार्यक्रम सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक अवसर मुहैया कराते हैं और कैनेडी सेंटर यहां वाशिंगटन, डी.सी. में संस्कृति मंत्रालय जैसा बन गया है जो दुनिया भर के देशों की सरकारों के साथ काम कर रहा है। भारत और दूसरी जगहों से आए कलाकारों का प्रदर्शन हमारा परिचय उन संस्कृतियों की विविधता से कराता है। ऐसे में हम उन्हें अपनी डांस सीरीज या चैंबर म्यूजिक सीरीज जैसे हमेशा होने वाले कार्यक्रमों में शामिल कर सकते हैं, जिससे वे हमारे मुख्य मंच पर जगह बना सकते हैं।''

एडम्स को इस समारोह के लिए किए गए शोध में आनंद आया। इसके तहत उन्हें छह बार भारत की यात्रा करनी पड़ी, ताकि भारतीय कला के उद्गम, उसकी विविधता और जटिलता की बेहतर समझ के लिए खुद को पूरी तरह झोंक सकें। एडम्स मुस्कराते हुए कहती हैं कि वैसे तो इस उत्सव की योजना और कलाकारों का चयन आसान नहीं था। ''भारत से यहां आकर कार्यक्रम करने वाले 500 कलाकारों के लिए वीजा का प्रबंध करना सबसे कठिन चुनौती थी।''

-जेन वार्नर मल्होत्रा

थिएटर और संगीत

मैक्सिमम इंडिया में वाशिंगटन के नेशनल सिंफॉनी ऑर्केस्ट्रा ने तीन कार्यक्रम किए। इनमें से एक की रचना तबला वादक जाकिर हुसैन ने खासकर इसी उत्सव के लिए की थी। उन्होंने तबले पर संगत दी जबकि क्रिस्टोफ एस्चेनबैक ने ऑर्केस्ट्रा का संचालन संभाला हुआ था। संगीत में राग, सूफी कलाम और ईसाई चर्च संगीत, तीनों थे।

‘गजल क्वीन’ के नाम से चर्चित वत्सला मेहरा के अलावा ‘राग पियानिस्ट’ उत्सव लाल ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं।

कैनेडी सेंटर का छोटा-सा टैरेस थियेटर समकालीन रॉक, जैज़ और दूसरी संगीत प्रस्तुतियों का गवाह रहा, जो विभिन्न शैलियों का मिश्रण था। प्रस्तुतियों में गिटार, वायलिन के अलावा तबला वादक सुफला, भारत-पाकिस्तान गठजोड़ द्वारा जैज़ तथा ड्रमर और कंपोजर सन्नी जैन, संगीत निर्देशक डी.जे.रेखा और पंजाबी एम.सी की प्रस्तुतियां शामिल थीं।

रॉयस्टीन एबेल के नेतृत्व में राजस्थान के सूफी पंथ द्वारा पेश ‘द मनगनियार सिडक्शन’ समारोह का एक अन्य आकर्षण था। इसमें 43 संगीतकार 36 लाल क्यूबिकल्स में बैठे थे, जो संगीत के लय के साथ-साथ अकेले और सामूहिक रूप से भी जगमगाते थे, जो एक असाधारण मल्टीमीडिया अनुभव था।

एबेल ने नेशनल पब्लिक रेडियो पर एक इंटरव्यू में कहा, ‘‘ये सभी रचनाएं दरअसल सूफी गजल हैं, जो ब्रह्मांड और ईश्वर को संबोधित हैं। यह दरअसल मिली-जुली प्रस्तुति है, जो न कंसर्ट है और न ही नाट््य प्रस्तुति, बल्कि इसका उद्देश्यश्रोताओं को मनगनियाओं के संगीत के बारे में बताना और उसका अहसास कराना है।’’

़िफल्म, साहित्य और प्रदर्शनियां
़िफल्म दिखाए जाने के अलावा इस समारोह में बॉलीवुड और दूसरी जगहों के अभिनेता और फिल्मकार भारतीय फिल्म इंडस्ट्री और फिल्मों में औरतों के चित्रण पर परिचर्चाओं में भाग लेने आए। इनमें नंदिता दास, शबाना आजमी, शर्मिला टैगोर जैसी अभिनेत्रियां, अडूर गोपालकृष्णन और केतन मेहता जैसे फिल्म निर्देशक थे, तो दिलीप बसु जैसे फिल्म विशेषज्ञ भी शामिल थे।

भारतीय अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और उनके मोटली थियेटर ग्रुप ने मशहूर उर्दू लेखिका इस्मत खानम चुगताई की तीन छोटी कहानियों का नाट््य रूपांतरण पेश किया।

एक और परिचर्चा में विशेषज्ञों ने पत्रों और लेखों के जरिये मोहनदास करमचंद गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर के आपसी रिश्तों की खोज की। साहित्य और राजनीति के बीच के तनाव पर प्रकाश डालने के लिए तीन भिन्न-भिन्न लेखक ः उपन्यासकार सलमान रुश्दी, टिप्पणीकार-उपन्यासकार नयनतारा सहगल और ब्रिटेन में जन्मे पत्रकार और लेखक डेनियल डेलरिंपल एकत्र हुए।

कैनेडी सेंटर के तमाम हॉल और गैलरियों में समकालीन कला प्रदर्शनी लगाई गई, जिनमें अपने रंगों और विविधताओं में भारतीय साडि़यों, हाथपंखों और जयपुर के मशहूर जेम पैलेस के रत्नों और आभूषणों का प्रदर्शन किया गया था।

नई दिल्ली में मैक्सिमम इंडिया उत्सव की घोषणा करते हुए भारत में अमेरिकी राजदूत टिमोथी जे.रोमर ने कहा, ‘‘लोगों से लोगों के बीच के ये संबंध दोनों देशों को एक-दूसरे से जोड़ते हैं।’’

 


होवार्ड सिनकोट्टा America.gov के विशेष संवाददाता हैं।