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और लेख

  • स्मिथसॉनियन की फ्रीयर गैलरी और ऑर्थर एम. सैकलर गैलरी भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया की कलाकृतियों पर केंद्रित है। लाखों दर्शकों को इससे रूबरू कराने का जिम्मा डेबरा डायमंड का है।    

  • इंडिया इनोवेशन ग्रोथ प्रोग्राम भारत के अग्रणी उद्यमियों की पहचान कर और, स्थानीय और अमेरिकी कंपनियों एवं विश्वविद्यालयों के साथ भागीदारी कर, उन्हें सफलता के लिए आवश्यक सुविधाएं प्रदान करता है।

  • नई दिल्ली स्थित अमेरिकन सेंटर का नेक्सस इन्क्यूबेटर भारत-अमेरिकी गठबंधनों के बूते स्टार्ट-अप कंपनियों को गति देने के प्रयासों में जुटा है।

  • ‘‘द अदर वन पर्सेंट: इंडियंस इन पुस्तक में भारतीय अमेरिकियों की उल्लेखनीय सफलता का बारीक और आंकड़ों पर आधारित विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।  

  • फुलब्राइटर नवीना जाफा हेरिटेज वॉक और कला प्रस्तुतियों के जरिये भारत की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा दे रही हैं।

  • आईवीएलपी प्रतिभागी सरगम सिंह रसायली बताते हैं कि अमेरिका की यात्रा ने किस तरह भारत में जैवविविधता संरक्षण का काम आगे बढ़ाने में उनकी मदद की।  

  • अमेरिकी राजदूत सांस्कृतिक संरक्षण कोष से मिले अनुदान के जरिये की गई पुरातत्वीय खुदाई से हैदराबाद के कुतुब शाही परिसर के बारे में नई समझ विकसित हुई है।  

  • अमेरिकी राजदूत सांस्कृतिक संरक्षण कोष से मिले अनुदान से मुंबई में लैमिंग्टन रोड स्थित वाईएमसीए स्टूडेंट ब्रांच को मिला नया जीवन।  

  • युनाइटेड थियोलॉजिकल कॉलेज में अमेरिकी राजदूत सांस्कृतिक संरक्षण कोष की मदद से भारत के अतीत से जुड़ी हज़ारों स्मृतियों के संरक्षण का काम हो रहा है।  

  • आगा खान सांस्कृतिक न्यास ने अमेरिकी राजदूत सांस्कृतिक संरक्षण कोष की मदद से बताशेवाला मुगल मकबरा परिसर को उसका पुराना वैभव लौटाने में सफलता पाई है।  

  • सिड बरबैक और आईसी2 इंस्टीट्यूट भारत में उद्यमी संपदा निर्माण के लिए प्रशिक्षण देने में जुटे हैं। निदेशक सिड बरबैक कहते हैं, हम भारत में 500 से अधिक आविष्कारकों और उद्यमियों के साथ काम कर रहे हैं।

  • लोकतांत्रिक प्रणाली में तीसरे दल महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, लेकिन अमेरिका में उनकी भूमिका उतनी अहम नहीं है। सर्वेक्षण के मुताबिक, 60 प्रतिशत अमेरिकी महसूस करते हैं कि तीसरे प्रमुख दल की आवश्यकता है।  

  • अमेरिका में लोग सीधे राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए वोट नहीं देते। इसके बजाय इलेक्टर चुने जाते हैं जो मतदाताओं के लिए कड़ी की तरह काम करते हैं। पॉपुलर वोट के बजाय हार-जीत इलेक्टोरल कॉलेज पर निर्भर करती है।

  • ‘‘पारंपरिक मीडिया लगातार अपनी चमक खो रहा है। पहले लोगों को संबोधित करने के लिए प्रत्याशियों को मीडिया के पास आना पड़ता था।अब प्रत्याशी सोशल मीडिया के जरिये सीधे लोगों तक पहुंचते हैं।’’

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