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और लेख

  • साल 2017 में फुलब्राइट-नेहरू अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्रशासक गोष्ठी में सहभागिता करने वाले साबू थॉमस विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगी उत्पाद तैयार करने के लिए नैनो तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।  

  • प्रमोद देशमुख ने वर्ष 2010-11 में फुलब्राइट-नेहरू पर्यावरण लीडरशिप प्रोग्राम में भाग लिया। अब वह भारत के गांवों में जल संरक्षण परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं।  

  • फुलब्राइट-नेहरू प्रोग्राम से अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के ऐसे अवसरों के द्वार खुल जाते हैं, जो ज़िंदगी में एक ही बार मिलते हैं।  

  • हम आपकी राय जानना चाहते हैं! पत्रिका के बारे में अपनी राय जाहिर करने के लिए कृपया सर्वे प्रश्नावली में शामिल सवालों के जवाब दें।

  • अंतरराष्ट्रीय खानपान उद्यमी नए व्यंजन तैयार करने और सीखने के साथ ही तालमेल और दोस्ती के पुल भी बना रहे हैं।  

  • ऑल इंडिया म्यूज़ियम समिट 2019 ने संग्रहालयों के आधुनिकीकरण के लिए अमेरिकी और भारतीय विशेषज्ञों को एक मंच दिया, जहां वे एक-दूसरे के साथ आइडिया साझा कर सकें।  

  • नई दिल्ली स्थित अमेरिकन एम्बेसी स्कूल विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के साथ अमेरिकी शिक्षा मुहैया कराती है, जो उन्हें ज़िम्मेदार और संवेदनशील विश्व नागरिक बनने में मदद करती है।   

  • अमेरिकी फुलब्राइट-नेहरू फेलो डॉ. गीता मेहता का मानना है कि चिकित्सकों को प्रभावशाली संचार कौशल से लैस करके मरीजों की देखभाल और इलाज के नतीजे सुधारे जा सकते हैं।  

  • विज्ञान के विषयों पर लिखने वाली नंदिता जयराज ने तकनीक-कला क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर आईवीएलपी प्रोजेक्ट में अपनी सहभागिता के अनुभवों को साझा किया।  

  • अमेरिकी राजदूत के सांस्कृतिक संरक्षण कोष से हैदराबाद में 18वीं सदी की कवयित्री महा लका बाई चंदा के मकबरे को संवारने के काम में मदद मिली।  

  • अमेरिका के हाई स्कूल विद्यार्थी एक्सचेंज प्रोग्राम के जरिये हिंदी सीखने के साथ ही भारतीय संस्कृति से भी रूबरू हो रहे हैं।

  • अमेरिकी राजदूत सांस्कृतिक संरक्षण कोष से मिली मदद से गुजरात में चंपानेर-पावागढ़ में मेडी तालाब परिसर के संरक्षण में मदद मिल रही है।  

  • चेन्नई में दक्षिणचित्र जीवंत इतिहास संग्रहालय की स्थापना कर देबोरा त्यागराजन ने दक्षिण भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और संवर्धित करने की पहल की है।  

  • अमेरिकी राजदूत सांस्कृतिक संरक्षण कोष से मिले अनुदान ने वाराणसी के ऐतिहासिक बालाजी घाट को नए सिरे से संवारने और उसकी ऐतिहासिकता के विवरण को दर्ज़ करने में मदद की है।  

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